धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर क्या है कानून? BNS की धारा 298 से 302 समझें

BNS धारा 298 से 302: धार्मिक अपराध और सजा

भारत में सभी नागरिकों को अपने धर्म और धार्मिक मान्यताओं का पालन करने की स्वतंत्रता है। इसी के साथ कानून किसी व्यक्ति या समुदाय की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने, धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने या धार्मिक आयोजनों में बाधा डालने जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई का प्रावधान करता है।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) के अध्याय XVI में धर्म से संबंधित अपराधों के प्रावधान दिए गए हैं। धारा 298 से 302 में धार्मिक स्थल, धार्मिक भावनाओं, धार्मिक सभाओं और अंतिम संस्कार से जुड़े स्थानों के संबंध में अपराधों का उल्लेख है। BNS 1 जुलाई 2024 से लागू है।

BNS की धारा 298 क्या कहती है?

पूजा स्थल या पवित्र वस्तु को नुकसान पहुंचाना

यदि कोई व्यक्ति किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से किसी पूजा स्थल या पवित्र मानी जाने वाली वस्तु को नष्ट करता है, नुकसान पहुंचाता है या अपवित्र करता है, तो यह धारा 298 के अंतर्गत अपराध हो सकता है।

इसमें यह भी देखा जाता है कि आरोपी को यह जानकारी थी या नहीं कि उसके कृत्य से संबंधित धार्मिक समुदाय इसे अपने धर्म का अपमान मान सकता है।

सजा:

  • अधिकतम 2 वर्ष तक का कारावास, या
  • जुर्माना, या
  • दोनों।

BNS की धारा 299 क्या है?

जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना

धारा 299 उन मामलों से संबंधित है जहां कोई व्यक्ति जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी वर्ग के धार्मिक विश्वास या धर्म का अपमान करता है।

यह कार्य कई माध्यमों से हो सकता है, जैसे:

  • बोले गए शब्द
  • लिखे हुए शब्द
  • संकेत
  • दृश्य प्रस्तुति
  • इलेक्ट्रॉनिक माध्यम
  • अन्य किसी माध्यम से किया गया अपमान

सजा:
अधिकतम 3 वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

BNS की धारा 300 क्या है?

धार्मिक सभा में जानबूझकर बाधा डालना

यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसी कानूनी रूप से आयोजित धार्मिक सभा या धार्मिक पूजा/अनुष्ठान में जानबूझकर बाधा डालता है, तो धारा 300 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

इसका उद्देश्य धार्मिक पूजा और धार्मिक समारोहों को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने में सुरक्षा प्रदान करना है।

सजा:
अधिकतम 1 वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना या दोनों।

BNS की धारा 301 क्या है?

कब्रिस्तान, अंतिम संस्कार स्थल या शव के साथ अपमानजनक व्यवहार

धारा 301 के अंतर्गत ऐसे कृत्यों को अपराध माना गया है जिनमें किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने या उसके धर्म का अपमान करने के इरादे से:

  • पूजा स्थल में अनधिकृत प्रवेश करना,
  • कब्र या समाधि स्थल में अतिक्रमण करना,
  • अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित स्थान पर अतिक्रमण करना,
  • मृत व्यक्ति के अवशेषों को रखने के स्थान में अतिक्रमण करना,
  • मानव शव के साथ अपमानजनक व्यवहार करना,
  • अंतिम संस्कार में शामिल लोगों को परेशान या बाधित करना

जैसे कार्य शामिल हो सकते हैं।

सजा:
अधिकतम 1 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।

BNS की धारा 302 क्या है?

जानबूझकर किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले शब्द या संकेत

धारा 302 उस स्थिति से संबंधित है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से:

  • कोई शब्द बोलता है,
  • कोई आवाज करता है,
  • कोई इशारा करता है,
  • या ऐसा कोई वस्तु/प्रदर्शन करता है जो उस व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से हो।

सजा:
अधिकतम 1 वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों।

BNS की धारा 298 से 302 एक नजर में

धाराअपराधअधिकतम सजा
धारा 298पूजा स्थल/पवित्र वस्तु को नुकसान या अपवित्र करना2 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों
धारा 299जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण धार्मिक अपमान3 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों
धारा 300धार्मिक सभा में बाधा डालना1 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों
धारा 301कब्र/अंतिम संस्कार स्थल में अतिक्रमण या शव का अपमान1 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों
धारा 302जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले शब्द/इशारे1 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों

उपरोक्त प्रावधान भारतीय न्याय संहिता, 2023 की आधिकारिक धारा 298-302 पर आधारित हैं।

धार्मिक मामलों में कानून का उद्देश्य

इन प्रावधानों का उद्देश्य विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच शांति बनाए रखना और जानबूझकर किए गए ऐसे कृत्यों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करना है, जिनसे धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं या धार्मिक पूजा एवं अंतिम संस्कार जैसी गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

हालांकि, किसी भी मामले में यह तय करना कि कोई विशेष कृत्य अपराध की संबंधित धारा के अंतर्गत आता है या नहीं, मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करता है।

महत्वपूर्ण बात

सिर्फ किसी व्यक्ति द्वारा यह दावा कर देना कि उसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, अपने आप में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संबंधित कानून की आवश्यक शर्तें, आरोपी का इरादा, परिस्थितियां और अन्य तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं। वास्तविक कानूनी मामले में योग्य अधिवक्ता से सलाह लेना उचित है।

निष्कर्ष

BNS की धारा 298 से 302 धार्मिक स्थलों, धार्मिक विश्वासों, धार्मिक सभाओं, अंतिम संस्कार स्थलों और व्यक्तियों की धार्मिक भावनाओं से जुड़े विभिन्न अपराधों के संबंध में महत्वपूर्ण प्रावधान देती हैं। इनमें अपराध की प्रकृति के अनुसार 1 वर्ष से लेकर 3 वर्ष तक की अधिकतम सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

By:- ( Parminder Singh- BSc-IT, BA, Diploma In Multimedia Animation & VFX, BEMS )

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